जालंधर: बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में फार्मेसी अधिकारी भर्ती परीक्षा के दौरान सामने आए पेपर लीक और धांधली के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। जालंधर स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं विधायक परगट सिंह ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोला। परगट सिंह ने कहा कि बाबा फरीद यूनिवर्सिटी केवल एक सामान्य शिक्षण संस्थान नहीं है, बल्कि यह पंजाब की संपूर्ण मेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी भर्तियों की रीढ़ है। ऐसे में भर्ती परीक्षाओं, करोड़ों रुपये की खरीद-फरोख्त और प्रशासनिक कामकाज में किसी भी प्रकार की अनियमितता का सीधा प्रतिकूल प्रभाव प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों, अस्पतालों में आने वाले मरीजों और पंजाब के सरकारी खजाने पर पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की आधिकारिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच करवाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त जवाबदेही तय हो।
विधायक परगट सिंह ने भर्ती परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्रों के भीतर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज का खुलेआम इस्तेमाल हुआ और संदिग्ध रूप से परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी (CCTV) कैमरे बंद कर दिए गए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी, प्रश्न पत्रों की डिजिटल मूवमेंट व लॉग्स कहां और कैसे रखे गए, और परीक्षा केंद्रों के भीतर हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कैसे पहुंचे? उन्होंने कहा कि इस पूरी धांधली के कारण परीक्षा में शामिल हुए हजारों मेहनती और ईमानदार अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है। परगट सिंह ने अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए इस भर्ती परीक्षा को तुरंत रद्द कर दोबारा आयोजित करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने यूनिवर्सिटी में बिना स्वीकृत पदों (unsanctioned posts) के लगभग 1.25 लाख रुपये मासिक वेतन पर की गई संदिग्ध नियुक्तियों की भी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग रखी।
