SHABD, जालंधर, 20 मई:** पंजाब रोडवेज पनबस और पीआरटीसी (PRTC) के संविदा व पक्के कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जालंधर के बस स्टैंड डिपो-2 परिसर में भारी संख्या में एकत्र हुए रोडवेज कर्मचारियों ने सरकार की कथित ‘कर्मचारी विरोधी’ नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। इस मौके पर पंजाब रोडवेज पनबस कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के जनरल सेक्रेटरी रंजीत सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यूनियन द्वारा पहले 20 मई को संगरूर में एक अनिश्चितकालीन पक्का मोर्चा (बड़ा धरना) लगाने का फैसला किया गया था, लेकिन आंदोलन से ठीक पहले सूबे के परिवहन मंत्री और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ यूनियन के शीर्ष नेताओं की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने कर्मचारियों की जायज मांगों को हल करने का सकारात्मक आश्वासन तो दिया, लेकिन कोई भी लिखित वादा करने से साफ इनकार कर दिया। यूनियन नेताओं ने बताया कि सरकार ने नगर निगम और नगर पंचायत चुनावों के मद्देनजर लागू आचार संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) का हवाला देते हुए अगली उच्च स्तरीय बैठक के लिए आगामी 1 या 2 तारीख का समय निर्धारित किया है।
यूनियन के प्रांतीय नेता रंजीत सिंह ने सरकार को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अगली तय बैठक में उनके मसलों और मांगों का कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो संगठन द्वारा पूरे पंजाब में दोबारा एक तीखा और देशव्यापी स्तर का बड़ा चक्का जाम व धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी। कर्मचारियों ने साफ किया कि मंत्रियों के साथ हुई बैठक में परिवहन विभाग के भीतर चल रही विवादास्पद ‘किलोमीटर स्कीम’ को तुरंत पूरी तरह बंद करने, पिछले कई वर्षों से नाममात्र वेतन पर सेवाएं दे रहे कच्चे (अनुबंध) कर्मचारियों को अविलंब पक्का करने और संगरूर जेल में बंद अपने साथी कर्मचारियों की तुरंत और बिना शर्त रिहाई जैसी गंभीर मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है। रोष प्रदर्शन के अंत में रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी इन सभी मुख्य मांगों से संबंधित एक विस्तृत मांग-पत्र भी जिला प्रशासन के माध्यम से परिवहन मंत्री और वित्त मंत्री को प्रेषित किया।
